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पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण 50 प्रश्न

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Nutrition chapter of biology | Top 50 questions of nutrition  प्रोटीन से संबंधित प्रश्न कार्बोहाइड्रेट से संबंधित प्रश्न वसा से संबंधित प्रश्न खनिज से संबंधित प्रश्न हार्मोन से संबंधित प्रश्न भोजन के पोषक तत्व कौन-कौन से हैं पोषण / Nutrition Q1. जब जीव अपना भोजन मृत पौधों, मृत पशुओं और सड़ी हुई रोटियों आदि के सड़ते हुए  कार्बनिक पदार्थ से प्राप्त करता है, तो इसे कहते हैं: उत्तर. मृतपोषी पोषण (Saprotrophic nutrition) Q2. वैसा पोषण जिसमें जीव अपना भोजन अन्य जीवित जीव के शरीर से बिना उसे मारे प्राप्त करता है, कहलाता हैः उत्तर- परजीवी पोषण (Parasitic nutrition) Q3. कौन सी शर्करा तत्काल ऊर्जा प्रदान करती है? उत्तर- ग्लूकोज Q4. जंतुओं में जल की उपस्थिति कितने प्रतिशत होती है? उत्तर- 60% Q5. पौधों में जल की उपस्थिति कितने प्रतिशत होती है? उत्तर- 90% Q6. किनके जल अपघटन से ग्लिसरॉल एवं वसा अम्ल बनते हैं? उत्तर- वसाएँ Q7. वसा अम्लों का संश्लेषण कहाँ होता है? उत्तर- कोशिका व माइटोकॉन्ड्रिया Q8.   वसा अणु अन्य किस नाम से जाने जाते है? उत्तर- ...

जंतु जगत का वर्गीकरण (जीव विज्ञान)

जीवो का जंतु वर्गीकरण, Animal kingdom

जीवो का जंतु वर्गीकरण

आज किसी भी परीक्षा में जंतुओं के वर्गीकरण से एक या दो प्रश्न जरूर पूछा जाता है। बायोलॉजी में सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक भी माना जाता है। इस पोस्ट में जीव विज्ञान के महत्वपूर्ण चैप्टर जीवो में विविधता के टॉपिक जंतुओं का वर्गीकरण से संबंधित सभी महत्वपूर्ण टॉपिक को कवर कर रहे हैं। यहां पर सभी महत्वपूर्ण टॉपिक या तो परीक्षा में पूछे गए हैं या आने वाले परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है आप इन्हें जरूर पढ़ें।

यह टॉपिक थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन कुछ महत्वपूर्ण तथ्य जो परीक्षा में बार-बार आते हैं उसको जरूर याद कर लें और उस प्रकार के महत्वपूर्ण तथ्य यहां पर दिए जा रहे हैं

इस टॉपिक से जो महत्वपूर्ण प्रश्न बार-बार बनते हैं उसको हमने हाईलाइट कर दिया है उसे जरूर याद करें

Animal kingdom in hindi


जंतु जगत को कई फाइलम में बांटा गया है जो इस प्रकार है-

1. पोरीफेरा (Porifera)


  • ये द्वि-स्तरीय जन्तु होते हैं।
  • इस संघ के तहत आने वाले सभी जंतु खारे पानी में मिलते हैं। जिन्हें स्पंज कहा जाता है।
  • बहुकोशिकीय जंतु होते हुए भी इनकी कोशिकाएँ नियमित उतकों का निर्माण नहीं करती हैं।
  • इनके शरीर पर असंख्य छिद्र (Ostia) पाये जाते हैं।
  • इनमें मुख का अभाव होता है।
  • जैसे- स्पंजिला, ल्यूकोसोलोनिया, यूस्पंजिया (Bath Spange) स्पंजिला (Spongilla) के अन्दर शैवाल (Algae) पाये जाते हैं जो कि सहजीवी जीवन (Symbiotic life) व्यतीत करते हैं।
  • साइकॉन एवं स्पंज इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
  • Note:-स्पंज का प्रयोग ध्वनि के अवशोषण में किया जाता है।


2. सीलेंण्ट्रेटा (Coelenterata) :


  • इस संघ के जीव की सबसे प्रमुख विशेषता पॉलिप (Polyp) तथा मेडुसा (Medusa) अवस्था का पाया जाता है।
  • यह संघ निडेरिया के नाम से भी पुकारा जाता है।
  • पालिव जन्तु स्थान बन्द्ध एवं अलिंगी होते हैं, जबकि मेडुसा गतिशील एवं लिंगी होते हैं। जैसे- हाइड्रा (Hydra)। 
  • पुनरूद्भवन (Regeneration) की प्रचुर क्षमता के कारण इस जन्तु को हाइड्रा (यूरोप का एक जल दैत्य जिस का सिर काटने पर प्रतिदिन एक नया सिर बन जाता था) की संज्ञा दी गई।
  • इस संघ का एक अन्य उदाहरण 'समुद्री एनीमोन है।
  • इसके अन्दर क्रेप्स (केकड़ा के समान जन्तु) भरे होते हैं जो कि सहजीवी हैं।
  • पुर्तगाली युद्ध पोत भी इसी संघ का जन्तु है।
  • इसके तहत आने वाले अधिकांश जीव समुद्री जल में तथा कुछ स्वच्द जल में निवास करते हैं।
  • इस संघ के जीवों में उतक-स्तर संगठन पाया जाता | है।
  • इस संघ के कुछ जंतु प्रवाल भित्ति (Coral-Reet) का निर्माण करते हैं।
  • प्रवाल–भित्ती अपने चारों ओर रक्षात्मक–अस्थि का स्राव करते हैं जो बाद में मूंगा-रीफ बन जाते हैं।
  • संसार का सबसे बड़ा मुंगा–रीफ ग्रेट बैरियर रीफ (ऑस्ट्रेलिया) है।
  • इस संघ के अंतर्गत आने वाले जंतुओं के मुख के पास धागेनुमा संरचना पाई जाती है।
  • इस संघ के अंतर्गत आने वाले प्रमुख जीव हैं-हाइड्रा, जेलीफिश, सी. एनीमोन तथा मूगा आदि।


3. प्लेटीहेल्मिन्थीज (Platyhelminthes) :


  • यह एक उभयलिंगी (Bi-sexual) जंतुओं का संघ है।
  • इस संघ के जन्तु फीते के समान चपटे होते हैं तथा अग्रभाग पर चूसक या कांटे लगे होते हैं।
  • ये जन्तु उभयलिंगी तथा परजीवी होते हैं। जैसे–फीताक्रिमि (Tapewarm)।
  • इसका प्रथम पोषद मनुष्य तथा द्वितीय पोषद सुअर है।
  • फैसिओला हिपेटिका में मुख गुहा और गूदा नहीं होते।
  • इनमें फीता किमी में ज्वाला कोशिकाएं (Flame Cells) पायी जाती हैं जो उत्सर्जी अंग का कार्य करती हैं।
  • इन जंतुओं में पाचन तंत्र विकसित नहीं होते हैं, उत्सर्जन फ्लोएम कोशिकाओं द्वारा होता है।
  • प्लेनिरिया, लीवर फ्लुक, टेप वार्म, आदि इस संघ के जीवों के प्रमुख उदाहरण है।


4. ऐस्केलमिन्थीज (Aschelminthes) :


  • इस संघ के जन्तु धागानुमा (Threadlike) होते हैं।
  • ये भी परजीवी (parasite) होते हैं
  • इस संघ के तहत आने वाले जीव एकलिंगी (Unisexual) होते हैं तथा इनमें प्रोटोनेफ्रीडिया द्वारा उत्सर्जन होता है।
  • जैसे-ऐस्केरिस, बूचेरिया (Wuchereria- पीलपाँव (Elepheantasis) का जन्म देने वाला क्रिमि), पिनवर्म (Pinworm)- पेट में मिलने वाले छोटे कीड़े) इसके उदाहरण हैं।
  • इस संघ के तहत लंबे, बेलनाकार अखंडित कृमि (Worm) आते हैं।
  • इन जीवों में आहार नाल (Alimentary Canal) स्पष्ट होता है।
  • इस संघ के अंतर्गत आने वाले जीवों में श्वसन अंग (respiratory organ) नहीं होते परंतु तंत्रिका तंत्र (Nervous System) विकसित होते हैं।
  • एस्केरिस, शेडवर्म एवं वुचेरिया बैंक्रोपटी इस समूह के जंतुओं के प्रमुख उदाहरण हैं।
  • फाइलेरिया रोग का कारण गोलकृमि वुचेरिया बैंक्रोफ्टी होता है।

5. एनीलिडा (Annelida) :


  • इस संघ के जन्तु गोल एवं खण्ड युक्त होते हैं।
  • ये द्वि-लिंगी (Bisexual or Hermaphrodite) होते हैं।
  • इस संघ के जन्तु में रक्त परिसंचरण बन्द प्रकार (Closed Blood Vascular System) का होता है अर्थात् इन जन्तुओं का रक्त शुद्ध एवं अशुद्ध दोनों का मिश्रण होता है।
  • केंचुआ, जोंक, नेरिस आदि इसी श्रेणी के जन्तु हैं।
  • जोंक (Leech) में रक्त का थक्का न बनने देने के लिए उत्तरदायी 'हीरूडीन (Hirudine) नामक प्रोटीन एन्जाइम पायी जाती है।
  • केचुए में उत्सर्जन 'नेफ्रीडिया द्वारा होता है। इसे किसानों का मित्र कहते हैं।
  • इस संघ के जंतुओं में ‘प्रचलन (locomotion) काइटिन निर्मित सीटी (Setae) द्वारा होता हैं।
  • इस संघ के जीवों में आहार नाल पूर्णतः विकसित होता है तथा श्वसन त्वचा (skin) के द्वारा होता है। इनमें रूधिर लाल तथा तंत्रिका तंत्र साधारण होता है।
  • इनमें उत्सर्जन वृक्क (Kidney) द्वारा होता है तथा ये एकलिंगी एवं उभयलिंगी दोनों प्रकारों के होते हैं।
  • केंचुआ, जोंक एवं नेरीस जैसे जीव इस संघ के प्रमुख उदाहरण हैं।
  • केंचुआ में चार जोड़ी 8 हृदय होता है।

6. अर्थोपोडा (Arthropoda):


  • इस संघ (Phylum) के जन्तु के शरीर एवं पैर खण्ड युवत होते हैं।
  • इनमें रक्त परिसंचरण तन्त्र खुले प्रकार के होते हैं।
  • इनमें हृदय पृष्ठ भाग में (पीछे) पाये जाते हैं।
  • इनके पाद संधि युक्त होते हैं तथा रूधिर परिसंचरण तंत्र (Blood circulation System) खुले प्रकार (open type) के होते हैं।
  • इस संघ के जंतुओं में पायी जाने वाली देहगुहा (body cavity) को हीमोसील कहते हैं।
  • इनमें श्वसन ट्रैकिया, बुक लंग्स एवं सामान्य सतह द्वारा संपन्न होता हैं।
  • इस संघ के जंतु प्रायः एकलिंगी होते हैं तथा इनमें निषेचन आंतरिक होता है।
  • इस संघ के जन्तुओं की संख्या सर्वाधिक है जो जल, थल एवं वायु तीनों में पाये जाते हैं।
  • जैसे- टिड्डियाँ, काकरोच, बिच्छू, मकड़ी, मच्छर मक्खी, तितली, केकड़ा इत्यादि।
  • इस संघ के जन्तुओं में संयुक्त आँख (Compound eyes) पायी जाती हैं।
  • इनमें प्रत्येक आँख की लगभग 2000 नेत्रांशकों (Ommatidia- आँख की इकाई) के बने होते हैं और प्रत्येक नेत्रांशक एक स्वतन्त्र आँख के समान कार्य करता है। इसलिए इनकी आँखों में हजारों चित्र बनते हैं।
  • इस तरह इनकी, आँख में बना प्रतिबिम्ब 'सुपर पोजीशन प्रतिबिम्ब' कहलाता है और देखने की विधि मोजेक दृष्टि (Mokaic Vision) कहलाती है
  • बिच्छू (Scorpian) में श्वसन बुकलंग्स (Booklungs) द्वारा होता है। इस संघ के जन्तुओं में उत्सर्जन (Excretion) 'मलपीगी नलिकाओं द्वारा होते हैं।
  • इस संघ के जन्तुओं का शरीर सिर वक्ष एवं उदर जैसे तीन भागों में बंटा हुआ होता है।
  • तिलचट्टा (Cockroach), झींगा मछली, केकड़ा, खटमल, मक्खी, मच्छर मधुमक्खी एवं टिड्डी आदि इस संघ के प्रमुख उदाहरण हैं।
  • कीटों (insects) में 8 पाद एवं 4 पंख पाये जाते हैं।
  • तिलचट्टे (Cockroach) का हृदय 13 कक्षों का बना होता है।


7. मोलस्का (Mollusca):


  • इस संघ का नामकरण 1850 ई. में जोस्टन नामक वैज्ञानिक द्वारा किया गया।
  • इनका शरीर सिर अंतरांग तथा पाद जैसे तीन भागों में विभक्त होता है।
  • इस संघ के अधिकांश सदस्य सागरीय-जल में एवं कुछ स्वच्छ जल में पाये जाते हैं।
  • इनके चारों ओर एक कड़ा खोल पाया जाता है जिसे कवच कहते हैं।
  • इस संघ के जन्तुओं के मांशल शरीर खोल (Shell) से ढके होते हैं।
  • इनके जीवन में ट्रोकोफोर एवं वेलीजर लार्वा अवस्थाएं पायी जाती हैं।
  • घोंघा (Snail), सीपी (Unio) ऑक्टोपस, इत्यादि इस संघ के जन्तु हैं।
  • सीपी से मोती प्राप्त होते हैं।
  • सीपी के अन्दर कैल्सियम कार्बोनेट पहुँचते रहते हैं, जो सीपी से सावित एन्जाइम द्वारा मोती में परिवर्तित कर दिये जाते हैं।
  • ऑक्टोपस में 8 भुजाएं पायी जाती हैं जिसे शैतान मछली कहा जाता है।
  • इस संघ के जीवों में आहारनाल पूर्णतः विकसित होते हैं। मोलस्का संघ के प्राणियों में श्वसन गिल्स या टिनीडिया द्वारा होता है।
  • इनमें उत्सर्जन वृक्क द्वारा होता है तथा रक्त रंगहीन होता है।
  • इस संघ के कुछ जीव मोती (Pearl) का निर्माण करते हैं।
  • दुनिया का सबसे बड़ा अकशेरूक जंतु जायंट स्क्वीड है।


8. इकाइनोडर्मेटा (Echinodermata) :


  • ये केवल समुद्री जीव होते हैं।
  • इनकी सर्वप्रमुख विशेषता ‘जल संवहन तन्त्र (Water Vasular System) अथवा वीथि संस्थान (Ambulacral System) का पाया जाना है।
  • इनकी सहायता से जन्तु प्रचलन एवं श्वसन करते हैं।
  • तारा मछली (Star Fish), ब्रिटल स्टार (Brittle Star), समुद्री अर्चिन, समुद्री लिली, समुद्री खीरा (Sea Cucumber) आदि इस संघ के प्रमुख जन्तु हैं।
  • तारा मछली में 5 भुजाएं होती हैं।
  • इनमें जल संवहन तंत्र उपस्थिति रहता है।
  • इनके तंत्रिका तंत्र में मस्तिष्क विकसित नहीं रहता।

9. प्रोटोकोर्डेटा ( Protochordata)-


वर्गीकरण की पुरानी पद्धति के अनुसार हेमिकोर्डाटा को संघ कोर्डाटा के उप संघ के रूप में मान्यता दी गई है
परंतु नई पद्धति के अनुसार हेमिकोर्डाटा को एक स्वतंत्र संघ के रूप में मान्यता दी गई है
  • यह द्विपार्श्व सममित तथा ट्रिपलोब्लास्टिक होते हैं
  • इस संघ के जंतुओं में नोटोकॉर्ड उपस्थित होता है
  • इसमें तंत्रिका रज्जू उपस्थित होता है
  • इसके शरीर में वास्तविक देहगुहा पाई जाती है
  • उदाहरण:- वेलेनोग्लोशस, एम्फीआक्सस, बैंकिओस्टोमा


10. कोर्डेटा ( Chordata)-


  • यह जल और स्थल पर पाए जाने वाले ट्रिप्लोब्लास्टिक सीलोमेट जंतु है
  • इसमें नोटोकार्ड या पृष्ठ रज्जू उपस्थित होता है
  • इसमें ग्रसनी गिल छिद्र उपस्थित होता है
  • इसमें खोखला तंत्रिका रज्जू उपस्थित होता है
  • इसमें बंद रुधिर परिसंचरण तंत्र होता है
  • यह जंतु जगत का सबसे विकसित प्राणी है
  • कोर्डेटा के उपसंघ को पांच प्रमुख वर्गों में बांटा गया है
  1. पिसीज
  2. एंफीबिया
  3. रेपटिलिया
  4. एबीज
  5. मैमेलिया
Next post में  इन 5 वर्ग को के बारे में बताया जाएगा

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